अशुभ समय
आज का राहु काल
नई दिल्ली · शनिवार, 3 अक्टूबर 2026 · Read in English
राहु काल दिन का वह लगभग डेढ़ घंटे का हिस्सा है जिस पर छाया ग्रह राहु का प्रभाव माना जाता है। परंपरा से इस समय कोई नया या ज़रूरी काम शुरू नहीं किया जाता। सूर्योदय से सूर्यास्त तक के दिन को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है और उनमें से एक भाग राहु का होता है — हर वार को अलग भाग। इसके साथ दो और अशुभ खंड गिने जाते हैं, यमगंड और गुलिक काल। यात्रा, खरीदारी या किसी नए काम से पहले ज़्यादातर भारतीय घरों में यही तीन समय देखे जाते हैं।
आज के अशुभ काल
आज का सूर्योदय-सूर्यास्त
तीन अशुभ खंड: राहु काल, यमगंड और गुलिक काल
राहु काल इन तीनों में सबसे प्रसिद्ध है। यमगंड (यमघंट) यम से जुड़ा माना जाता है और कहा जाता है कि इसमें शुरू किए गए काम को पूरा होने में अड़चनें आती हैं। गुलिक काल, जिसे मांदि भी कहते हैं, शनि के उपग्रह गुलिक का खंड है और तीनों में सबसे हल्का माना जाता है। कई परंपराओं में मान्यता है कि गुलिक काल में शुरू हुआ काम दोहराया जाता है, इसलिए एक बार होने वाले काम इसमें टाले जाते हैं, पर जिस काम को लंबे समय तक टिकाना हो उसके लिए कभी-कभी इसे चुना भी जाता है।
चौघड़िया की तरह इनमें शुभ और अशुभ बारी-बारी से नहीं आते; ये तीनों दिन के एक-एक लगातार खंड हैं, जिनमें नई शुरुआत न करने की सलाह दी जाती है। ऊपर के कार्ड में आज के तीनों समय आपके शहर के अनुसार दिए गए हैं।
हर वार का राहु काल कैसे निकलता है
दिन की लंबाई को आठ बराबर भागों में बाँटिए। राहु काल इनमें से एक तय भाग होता है, जो वार से तय होता है: सोमवार को दूसरा, शनिवार को तीसरा, शुक्रवार को चौथा, बुधवार को पाँचवाँ, गुरुवार को छठा, मंगलवार को सातवाँ और रविवार को आठवाँ भाग। चूँकि यह असली सूर्योदय और दिन की असली लंबाई से जुड़ा है, इसलिए इसका घड़ी-समय मौसम और शहर के साथ खिसकता रहता है — किसी वार को यह सुबह पड़ता है तो किसी वार को दोपहर बाद।
किसी छपे पंचांग में दिया गया समय इसीलिए अक्सर अनुमान भर होता है, क्योंकि वह किसी एक संदर्भ शहर के हिसाब से छपा होता है। यह पेज आपके चुने हुए शहर के सूर्योदय और सूर्यास्त से आज का राहु काल नए सिरे से निकालता है, ताकि समय आपकी जगह के लिए सही हो।
राहु काल में क्या न करें — और किन पर यह लागू नहीं होता
परंपरा है कि राहु काल में कोई शुभ या ज़रूरी काम शुरू न करें: न किसी दस्तावेज़ पर हस्ताक्षर, न नए काम का उद्घाटन, न यात्रा की शुरुआत, न कोई संस्कार। ध्यान देने वाला शब्द है 'शुरू करना' — जो काम पहले से चल रहा है, उसे राहु काल आने पर रोकना ज़रूरी नहीं। रोज़ की दिनचर्या, चलती ज़िम्मेदारियाँ और आपात स्थिति इससे हमेशा मुक्त मानी जाती हैं।
दक्षिण भारत में राहु काल का विशेष ध्यान रखा जाता है और वहाँ के दैनिक कैलेंडर इसे रोज़ प्रमुखता से छापते हैं; उत्तर भारत में लोग इसे अक्सर चौघड़िया के साथ मिलाकर देखते हैं। ये सब पारंपरिक सावधानियाँ हैं, किसी व्यक्ति की भविष्यवाणी नहीं — ये दिन के बारे में बताती हैं, किसी की कुंडली के बारे में नहीं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
आज राहु काल कितने बजे से कितने बजे तक है?
राहु काल का समय हर दिन और हर शहर में अलग होता है। ऊपर के कार्ड में आपके चुने हुए शहर के लिए आज के राहु काल, यमगंड और गुलिक काल के शुरू और खत्म होने का सही समय दिया गया है।
क्या गुलिक काल हमेशा अशुभ होता है?
गुलिक काल तीनों में सबसे हल्का है। मान्यता है कि इसमें शुरू हुआ काम दोहराया जाता है, इसलिए एक बार के कामों के लिए इसे टाला जाता है, पर टिकाऊ कामों के लिए कभी-कभी इसे चुना भी जाता है।
क्या पहले से चल रहे काम पर राहु काल का असर होता है?
नहीं। सावधानी केवल नया काम शुरू करने के बारे में है। पहले से चल रहा काम, रोज़ की ज़िम्मेदारियाँ और आपात स्थिति इससे मुक्त मानी जाती हैं।
आज का पूरा पंचांग भी देखें — या चौघड़िया · शुभ मुहूर्त · अभिजीत मुहूर्त।
समय आपके चुने हुए शहर के लिए शास्त्रीय वैदिक गणना (लाहिरी अयनांश, दृक्) से निकाले गए हैं। शुभ और अशुभ समय पारंपरिक वर्गीकरण हैं, जो संदर्भ के लिए दिए गए हैं — ये व्यक्तिगत भविष्यवाणी नहीं हैं।