हिंदू वैदिक कैलेंडर

30 जुलाई 2027 का पंचांग

नई दिल्ली · शुक्रवार, 30 जुलाई 2027

Read in English

30 जुलाई 2027 को क्या है? नीचे शुक्रवार, 30 जुलाई 2027 का पूरा पंचांग है — तिथि, नक्षत्र, योग, करण, सूर्योदय और राहु काल, साथ में उस दिन के व्रत-त्योहार।

शनि के लंबे चक्र भी देख रहे हैं? अपनी साढ़े साती जाँचें — आप उसमें हैं या नहीं, और वह कब समाप्त होगी।

शुभ और अशुभ समय, विस्तार से: चौघड़िया · राहु काल · शुभ मुहूर्त · अभिजीत मुहूर्त. सभी 27 नक्षत्र.

तिथि
द्वादशी
02:19:21 (अगले दिन) तक · कृष्ण पक्ष
नक्षत्र
मृगशिरा
01:24:01 (अगले दिन) तक
चरण 1
योग
ध्रुव
करण
कौलव
सूर्योदय
05:45
सूर्यास्त
19:10
चंद्रोदय
02:01
चंद्रास्त
16:24

शुभ मुहूर्त — शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त04:20 – 05:03
अभिजीत मुहूर्त12:00 – 12:54
विजय मुहूर्त12:01 – 12:54
अमृत काल17:22 – 18:49
गोधूलि मुहूर्त18:56 – 19:20
निशिता मुहूर्त00:07 (अगले दिन) – 00:49 (अगले दिन)

अशुभ समय

राहु काल10:46 – 12:27
यमगंड15:48 – 17:29
गुलिक काल07:25 – 09:06
दुर्मुहूर्त 108:26 – 09:19
दुर्मुहूर्त 212:54 – 13:47
वर्ज्य काल08:35 – 10:03

चौघड़िया · दिन

तमिल गौरी पंचांगम →
चर
05:45–07:25
लाभ
07:25–09:06
अमृत
09:06–10:46
काल
10:46–12:27
शुभ
12:27–14:08
रोग
14:08–15:48
उद्वेग
15:48–17:29
चर
17:29–19:09

चौघड़िया · रात

तमिल गौरी पंचांगम →
रोग
19:09–20:29
काल
20:29–21:48
लाभ
21:48–23:08
उद्वेग
23:08–00:27
शुभ
00:27–01:47
अमृत
01:47–03:06
चर
03:06–04:26
रोग
04:26–05:45

चंद्र मास, संवत और ऋतु

वारशुक्रवार
पक्षकृष्ण पक्ष
अमांत मासआषाढ़
पूर्णिमांत मासश्रावण
ऋतुग्रीष्म
अयनदक्षिणायन
शक संवत1949 प्लवंग
विक्रम संवत2084
दिनमान13 घंटे 24 मिनट

सूर्य और चंद्र राशि

चंद्र राशिवृषभ
सूर्य राशिकर्क
नक्षत्र चरणचरण 1

पंचांग संदर्भ के लिए शास्त्रीय वैदिक कैलेंडर गणनाएँ (लाहिड़ी अयनांश, द्रिक) प्रस्तुत करता है। शुभ और अशुभ समय पारंपरिक वर्गीकरण हैं, व्यक्तिगत भविष्यवाणी नहीं।

आज का पंचांग क्या बताता है

पंचांग का अर्थ है पाँच अंग — तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण — और ऊपर का पूरा पृष्ठ इन्हीं पाँच अंगों पर बना है। तिथि चंद्र दिवस है: चंद्रमा जब सूर्य से बारह अंश आगे निकलता है, तब एक तिथि पूरी होती है, इसलिए एक चंद्र मास में तीस तिथियाँ होती हैं — पंद्रह शुक्ल पक्ष में और पंद्रह कृष्ण पक्ष में। वार सप्ताह का दिन है, जिसकी गिनती आधी रात से नहीं, बल्कि एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक होती है। नक्षत्र वह चंद्र मंडल है जिसमें चंद्रमा स्थित है — 13°20′ के सत्ताईस बराबर भागों में से एक। योग सूर्य और चंद्रमा के भोगांशों के जोड़ से बनता है, जो फिर सत्ताईस भागों में बँटा है। करण आधी तिथि है; महीने भर में ग्यारह करण चलते हैं, जिनमें चार स्थिर हैं और सात बार-बार आते हैं।

पाँचों अंग मिलकर पारंपरिक कैलेंडर में दिन का स्वरूप बताते हैं। इसी कारण कोई व्रत, त्योहार या पारिवारिक संस्कार ग्रेगोरियन तारीख से नहीं, बल्कि तिथि और नक्षत्र से तय किया जाता है।

आज की तिथि कैसे पढ़ें

तिथि घड़ी के हिसाब से नहीं चलती। चंद्रमा की गति घटती-बढ़ती रहती है, इसलिए एक तिथि लगभग उन्नीस से छब्बीस घंटे तक की हो सकती है और दिन या रात के किसी भी समय शुरू हो सकती है। अधिकांश व्रत-त्योहारों में उदया तिथि मानी जाती है — यानी स्थानीय सूर्योदय के समय चल रही तिथि। इसीलिए यह पृष्ठ वर्तमान तिथि के साथ उसके समाप्त होने का समय भी दिखाता है।

जो छोटी तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर खत्म हो जाए, वह किसी सूर्योदय को नहीं छूती और क्षय तिथि कहलाती है। जो लंबी तिथि दो सूर्योदयों तक फैली हो, वह दोनों दिन गिनी जाती है और वृद्धि तिथि कहलाती है। इसलिए एकादशी, पूर्णिमा, अमावस्या या चतुर्थी जैसे तिथि से जुड़े व्रत कभी-कभी अपेक्षित दिन से एक दिन पहले या बाद में पड़ते हैं।

हिंदू कैलेंडर और चंद्र मास

चंद्र मास के नाम दो पद्धतियों से रखे जाते हैं। अमांत पद्धति में, जो दक्षिण और पश्चिम भारत के बड़े हिस्से में चलती है, महीना एक अमावस्या से अगली अमावस्या तक चलता है। पूर्णिमांत पद्धति में, जो उत्तर भारत में प्रचलित है, महीना एक पूर्णिमा से अगली पूर्णिमा तक चलता है, इसलिए कृष्ण पक्ष पर अगले महीने का नाम आ जाता है। यह पृष्ठ दोनों नाम दिखाता है, साथ ही विक्रम संवत और शक संवत, साठ वर्ष के चक्र से संवत्सर का नाम, ऋतु (छह में से एक) और अयन — सूर्य उत्तर की ओर चल रहा है या दक्षिण की ओर।

शहर बदलने पर पंचांग क्यों बदलता है

इस पृष्ठ के सभी समय आपके चुने हुए शहर के सूर्योदय और सूर्यास्त पर आधारित हैं। राहु काल, यमगंड और गुलिक काल स्थानीय दिनमान के निश्चित भाग हैं; चौघड़िया स्थानीय दिन और रात को आठ-आठ भागों में बाँटता है; अभिजीत मुहूर्त स्थानीय मध्याह्न पर आता है। इसलिए एक ही तारीख को दिल्ली और चेन्नई का पंचांग अलग-अलग समय दिखाएगा, जबकि किसी तिथि या नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है — बस स्थानीय समय में अलग लिखा जाता है।

ये शास्त्रीय कैलेंडर गणनाएँ केवल संदर्भ के लिए हैं। किसी विशेष समय के लिए चौघड़िया, राहु काल, शुभ मुहूर्त और अभिजीत मुहूर्त के अलग पृष्ठ हर समय को विस्तार से समझाते हैं।