नवग्रह: वैदिक ज्योतिष के नौ ग्रह
वैदिक ज्योतिष की पूरी इमारत नौ ग्रहों पर टिकी है। यहाँ हर ग्रह का छोटा परिचय है, और हर कार्ड से उस ग्रह के विस्तृत पृष्ठ पर जा सकते हैं।
नौ ग्रह
- सूर्य ग्रहग्रहों का राजा और आत्मा का कारक। पिता, अधिकार, मान-सम्मान और प्राणशक्ति से जुड़ा सूर्य मेष में उच्च होता है और रविवार का स्वामी है।पूरा पढ़ें →
- चंद्र ग्रहमन और माता का कारक, ग्रहों की रानी। चंद्र राशि से ही राशिफल देखा जाता है; यह वृषभ में उच्च होता है और सोमवार का स्वामी है।पूरा पढ़ें →
- मंगल ग्रहग्रहों का सेनापति, जो साहस, ऊर्जा, भूमि और छोटे भाई-बहनों का कारक है। मकर में उच्च मंगल की चौथी और आठवीं विशेष दृष्टि होती है।पूरा पढ़ें →
- बुध ग्रहबुद्धि, वाणी, व्यापार और लेखन का ग्रह, जिसे युवराज कहा गया है। कन्या राशि में उच्च बुध जिस ग्रह के साथ बैठता है, उसी का रंग ले लेता है।पूरा पढ़ें →
- गुरु ग्रहबृहस्पति, सबसे बड़ा शुभ ग्रह: ज्ञान, संतान, धर्म और गुरुजनों का कारक। लगभग एक साल में राशि बदलने वाला गुरु कर्क में उच्च होता है।पूरा पढ़ें →
- शुक्र ग्रहप्रेम, विवाह, कला और सुख-सुविधा का ग्रह, और असुरों के आचार्य। मीन में उच्च शुक्र की विंशोत्तरी महादशा 20 वर्ष की, यानी सबसे लंबी होती है।पूरा पढ़ें →
- शनि ग्रहआयु, परिश्रम, अनुशासन और धैर्य का ग्रह, और नवग्रहों में सबसे धीमा। तुला में उच्च शनि लगभग ढाई साल एक राशि में रहता है।पूरा पढ़ें →
- राहु ग्रहचंद्र-पथ का उत्तरी बिंदु, एक छाया ग्रह। महत्वाकांक्षा, विदेश, अचानक घटनाओं और भ्रम का कारक राहु उल्टा चलता है और ग्रहण से जुड़ा है।पूरा पढ़ें →
- केतु ग्रहचंद्र-पथ का दक्षिणी बिंदु और राहु का दूसरा सिरा। वैराग्य, अंतर्ज्ञान और मोक्ष का कारक केतु अश्विनी, मघा और मूल नक्षत्रों का स्वामी है।पूरा पढ़ें →
नवग्रह एक तालिका में
| ग्रह | वार | स्वराशि | उच्च राशि | नीच राशि |
|---|---|---|---|---|
| सूर्य | रविवार | सिंह | मेष (10°) | तुला (10°) |
| चंद्र | सोमवार | कर्क | वृषभ (3°) | वृश्चिक (3°) |
| मंगल | मंगलवार | मेष और वृश्चिक | मकर (28°) | कर्क (28°) |
| बुध | बुधवार | मिथुन और कन्या | कन्या (15°) | मीन (15°) |
| गुरु | गुरुवार | धनु और मीन | कर्क (5°) | मकर (5°) |
| शुक्र | शुक्रवार | वृषभ और तुला | मीन (27°) | कन्या (27°) |
| शनि | शनिवार | मकर और कुंभ | तुला (20°) | मेष (20°) |
| राहु | अपना कोई वार नहीं | कुंभ | वृषभ | वृश्चिक |
| केतु | अपना कोई वार नहीं | वृश्चिक | वृश्चिक | वृषभ |
जन्म कुंडली में जो कुछ पढ़ा जाता है, चाहे वह स्वभाव हो, करियर, विवाह या दशा, उसकी जड़ में नौ ग्रह ही हैं। संस्कृत में इन्हें नवग्रह कहते हैं: सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु और केतु। हर ग्रह जीवन के कुछ ख़ास विषयों का कारक है, हर एक का अपना स्वभाव, अपनी राशियाँ और अपने मित्र-शत्रु हैं, और आकाश में हर एक की चाल अलग है। इस पृष्ठ पर पहले यह समझाया गया है कि ज्योतिष में ग्रह किसे कहते हैं और उन्हें कैसे पढ़ा जाता है; नीचे के कार्डों से आप किसी भी ग्रह के विस्तृत पृष्ठ पर जा सकते हैं, जहाँ उसकी उच्च-नीच राशि, गोचर, बारह भावों के संकेत और पारंपरिक उपाय दिए गए हैं।
नवग्रह का अर्थ: ज्योतिष में ग्रह किसे कहते हैं
बृहत् पाराशर होरा शास्त्र में महर्षि पराशर एक सीधी परिभाषा देते हैं: आकाश की जो ज्योतियाँ अपनी जगह पर टिकी रहती हैं, वे नक्षत्र हैं, और जो नक्षत्रों के बीच चलती दिखती हैं, वे ग्रह। इसी परिभाषा के कारण सूर्य और चंद्रमा भी ज्योतिष में ग्रह हैं, जबकि खगोल विज्ञान सूर्य को तारा और चंद्रमा को उपग्रह कहता है। ग्रह शब्द का एक अर्थ पकड़ने वाला भी है, यानी वह जो जीवन के किसी हिस्से को अपने प्रभाव में ले ले।
पृथ्वी को नवग्रहों में नहीं गिना जाता, क्योंकि पूरी कुंडली पृथ्वी से देखे गए आकाश का नक्शा है। यूरेनस, नेपच्यून और प्लूटो जैसे दूर के ग्रह पारंपरिक वैदिक ज्योतिष का हिस्सा नहीं हैं; शास्त्रीय ग्रंथ इन्हीं नौ पर अपने सारे नियम खड़े करते हैं।
सात दिखने वाले ग्रह और दो छाया ग्रह
सूर्य से शनि तक के सात ग्रह आँखों से देखे जा सकते हैं, और हमारे सप्ताह के सातों वार इन्हीं के नाम पर हैं: रविवार सूर्य का, सोमवार चंद्र का, मंगलवार मंगल का, बुधवार बुध का, गुरुवार गुरु का, शुक्रवार शुक्र का और शनिवार शनि का। राहु और केतु का कोई पिंड नहीं है। ये चंद्रमा की कक्षा और सूर्य के मार्ग के कटान के दो बिंदु हैं, जो हमेशा एक-दूसरे के ठीक सामने रहते हैं और उल्टी दिशा में चलते हैं। इसीलिए इन्हें छाया ग्रह कहते हैं, और सूर्य तथा चंद्र के ग्रहण इन्हीं बिंदुओं के पास लगते हैं।
पराशर ने ग्रहों को एक राजदरबार की तरह भी बाँटा है: सूर्य राजा, चंद्र रानी, मंगल सेनापति, बुध युवराज, गुरु और शुक्र मंत्री, शनि सेवक, और राहु-केतु सेना। यह मंत्रिमंडल याद रखने में आसान है और हर ग्रह के स्वभाव की झलक देता है।
शुभ ग्रह और पाप ग्रह का सही अर्थ
शास्त्र गुरु, शुक्र, बढ़ते चंद्र और अकेले बुध को नैसर्गिक शुभ ग्रह मानते हैं, और सूर्य, मंगल, शनि, राहु, केतु तथा घटते चंद्र को पाप ग्रह। बुध की ख़ासियत यह है कि पाप ग्रहों के साथ बैठने पर वह उन्हीं जैसा फल देने लगता है। पर पाप का अर्थ बुरा या डरावना नहीं, बल्कि कठोर और तपाने वाला है। तीसरे, छठे और ग्यारहवें जैसे भावों में पाप ग्रह अक्सर बहुत अच्छे माने जाते हैं, और किसी कुंडली में कौन ग्रह शुभ फल देगा, यह लग्न के अनुसार भावों के स्वामित्व से भी तय होता है। इसलिए किसी ग्रह को अपने आप में अच्छा या बुरा मान लेना शास्त्रीय दृष्टि नहीं है।
ग्रह, राशि और भाव का मेल
कुंडली पढ़ने का सबसे सरल सूत्र यह है: ग्रह बताता है क्या, राशि बताती है कैसे, और भाव बताता है जीवन के किस क्षेत्र में। उदाहरण के लिए, बुध वाणी और बुद्धि का ग्रह है; अगर वह अपनी उच्च राशि कन्या में दसवें भाव में हो, तो परंपरा इसे काम-काज में व्यवस्थित, विश्लेषण वाली बुद्धि के संकेत के रूप में पढ़ती है। इसके बाद ज्योतिषी देखता है कि उस ग्रह पर किन ग्रहों की दृष्टि है, वह किनके साथ बैठा है, और अपनी राशि के स्वामी से उसका संबंध कैसा है। हर ग्रह के पृष्ठ पर उसके बारह भावों के शास्त्रीय संकेत इसी समझ के लिए दिए गए हैं।
गोचर और दशा: ग्रहों का समय कैसे देखा जाता है
ग्रहों का असर समय के साथ दो तरह से देखा जाता है। गोचर का मतलब है ग्रहों की आज की चाल, जिसे जन्म के चंद्रमा से गिनकर पढ़ा जाता है: चंद्रमा सवा दो दिन में राशि बदलता है, गुरु लगभग एक साल में, और शनि लगभग ढाई साल में। दशा जन्म के समय से चलने वाला एक तय क्रम है; सबसे प्रचलित विंशोत्तरी दशा 120 वर्ष की है, जिसमें केतु के 7, शुक्र के 20, सूर्य के 6, चंद्र के 10, मंगल के 7, राहु के 18, गुरु के 16, शनि के 19 और बुध के 17 वर्ष आते हैं। ज्योतिष की परंपरा में दशा को मुख्य धारा और गोचर को उसकी लहरें माना जाता है।
अपनी कुंडली में ग्रह कैसे देखें
अपनी कुंडली में ग्रहों की स्थिति जानने के लिए जन्म की तारीख़, सही समय और जन्मस्थान चाहिए। इस साइट पर मुफ़्त जन्म कुंडली बनाकर आप देख सकते हैं कि कौन ग्रह किस राशि, भाव और नक्षत्र में है, और कौन सी महादशा चल रही है। फिर उस ग्रह का पृष्ठ खोलें और उसके भाव वाले संकेत पढ़ें। ध्यान रहे कि ये शास्त्रीय मान्यताएँ हैं, जीवन के बारे में अंतिम निर्णय नहीं; पूरी कुंडली में सभी ग्रहों को साथ देखकर ही कोई संतुलित तस्वीर बनती है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
ज्योतिष में 9 ग्रह कौन से हैं?
वैदिक ज्योतिष के नौ ग्रह हैं: सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु (बृहस्पति), शुक्र, शनि, राहु और केतु। इनमें पहले सात आकाश में दिखाई देते हैं, जबकि राहु और केतु छाया ग्रह हैं।
नवग्रह क्या है?
नवग्रह का अर्थ है नौ ग्रह। वैदिक ज्योतिष इन्हीं नौ ग्रहों की राशि, भाव, नक्षत्र और दशा के आधार पर कुंडली पढ़ता है, और मंदिरों में नवग्रहों की एक साथ पूजा की परंपरा भी है।
राहु और केतु को छाया ग्रह क्यों कहते हैं?
राहु और केतु का कोई भौतिक पिंड नहीं है। ये चंद्रमा की कक्षा और सूर्य के मार्ग के कटान के दो बिंदु हैं, जिनके पास ग्रहण लगते हैं, इसलिए इन्हें छाया ग्रह कहा जाता है।
शुभ ग्रह और पाप ग्रह कौन से हैं?
गुरु, शुक्र, बढ़ता चंद्र और अकेला बुध नैसर्गिक शुभ ग्रह हैं, जबकि सूर्य, मंगल, शनि, राहु, केतु और घटता चंद्र पाप ग्रह। फिर भी किसी कुंडली में असली फल भाव, राशि और लग्न पर निर्भर करता है।
क्या पृथ्वी, यूरेनस और नेपच्यून भी ज्योतिष के ग्रह हैं?
पारंपरिक वैदिक ज्योतिष में नहीं। कुंडली पृथ्वी से देखे गए आकाश का नक्शा है, इसलिए पृथ्वी उसमें ग्रह नहीं है, और शास्त्रीय ग्रंथ यूरेनस, नेपच्यून या प्लूटो का उपयोग नहीं करते।
अपनी कुंडली में ग्रहों की स्थिति कैसे जानें?
जन्म की तारीख़, सही समय और जन्मस्थान डालकर इस साइट पर मुफ़्त जन्म कुंडली बनाइए। उसमें हर ग्रह की राशि, भाव, नक्षत्र और चल रही महादशा दिखती है, जिसे आप संबंधित ग्रह के पृष्ठ से मिलाकर पढ़ सकते हैं।