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तुला राशि के नाम — रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, ते से लड़कों और लड़कियों के नाम

तुला राशि के नौ अक्षर हैं: रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, ते। ये चित्रा (चरण 3–4), स्वाति (चारों चरण), विशाखा (चरण 1–3) के नामाक्षर हैं, इसलिए बच्चे का अक्षर इस बात से तय होता है कि जन्म के समय चंद्रमा किस नक्षत्र के किस चरण में था। नीचे हर अक्षर का नक्षत्र और चरण, 40 लड़कों और 39 लड़कियों के नाम अर्थ सहित, और नाम चुनने की परंपरा दी गई है।

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तुला राशि के नामाक्षर

हर अक्षर किसी नक्षत्र के एक चरण का है; जन्म के समय चंद्रमा जिस चरण में था, वही बच्चे का अक्षर है।

अक्षरनक्षत्रचरण
राचित्रा3
रीचित्रा4
रूस्वाति1
रेस्वाति2
रोस्वाति3
तास्वाति4
तीविशाखा1
तूविशाखा2
तेविशाखा3

अक्षर: अवकहड़ा चक्र (नामकरण के पारंपरिक अक्षर)।

तुला राशि के लड़कों के नाम

40 नाम, हर नाम ऊपर दिए किसी अक्षर से शुरू होता है, अर्थ सहित।

नामअर्थअक्षर
राघवRaghavरघु के वंशज; भगवान रामRa
रघुनाथRaghunathरघुकुल के स्वामी; भगवान रामRa
रघुवीरRaghuvirरघुकुल के वीर; भगवान रामRa
राहुलRahulगौतम बुद्ध के पुत्र का नामRa
राजRajशासन, राज्यRa
रजतRajatचाँदीRa
राजीवRajeevनील कमलRa
राजेंद्रRajendraराजाओं के राजाRa
राजेशRajeshराजाओं के स्वामीRa
राजकुमारRajkumarराजकुमारRa
राकेशRakeshपूर्णिमा की रात के स्वामी; चंद्रमाRa
रामRamभगवान रामRa
रमाकांतRamakantरमा के पति; भगवान विष्णुRa
रामचंद्रRamchandraभगवान रामRa
रमेशRameshरमा के स्वामी; भगवान विष्णुRa
रामेश्वरRameshwarराम के ईश्वर; भगवान शिवRa
रंजनRanjanमन को प्रसन्न करने वालाRa
रणजीतRanjitरण में विजयीRa
रणवीरRanveerरणभूमि का वीरRa
रतनRatanरत्नRa
रविRaviसूर्यRa
रवींद्रRavindraसूर्यदेवRa
रिपुदमनRipudamanशत्रुओं का दमन करने वालाRi
रोहनRohanऊपर चढ़ने वालाRo
रोहितRohitलाल; उगता सूर्यRo
रुद्रRudraभगवान शिव का रौद्र रूपRu
रूपेशRupeshरूप के स्वामीRu
तन्मयTanmayतल्लीन, मग्नTa
तनुजTanujपुत्रTa
तपनTapanसूर्य; तापTa
तपसTapasतपस्याTa
तारकTarakतारने वाला; ताराTa
तरुणTarunयुवाTa
तेजसTejasतेज, चमकTe
तिलकTilakमाथे पर लगाया जाने वाला टीकाTi
त्रिभुवनTribhuvanतीनों भुवनTi
त्रिलोचनTrilochanतीन नेत्रों वाले; भगवान शिवTi
त्रिलोकTrilokतीनों लोकTi
त्रिविक्रमTrivikramतीन पगों वाले भगवान विष्णुTi
तुषारTusharतुषार, हिमTu

तुला राशि की लड़कियों के नाम

39 नाम, हर नाम ऊपर दिए किसी अक्षर से शुरू होता है, अर्थ सहित।

नामअर्थअक्षर
रचनाRachnaरचना, निर्माणRa
राधाRadhaश्रीकृष्ण की प्रियाRa
राधिकाRadhikaराधा का नामRa
रागिनीRaginiराग, संगीत की धुनRa
राजेश्वरीRajeshwariराजराजेश्वरी, देवीRa
राजकुमारीRajkumariराजकुमारीRa
रजनीRajniरातRa
राखीRakhiरक्षा का पवित्र सूत्रRa
रक्षाRakshaसुरक्षाRa
रमाRamaदेवी लक्ष्मीRa
रम्याRamyaसुंदर, मनोरमRa
रानीRaniरानीRa
रंजनाRanjanaमन को प्रसन्न करने वालीRa
रश्मिRashmiकिरणRa
रतिRatiकामदेव की पत्नीRa
रत्नाRatnaरत्नRa
रेखाRekhaलकीर, रेखाRe
रेणुRenuधूल, कणRe
रेणुकाRenukaपरशुराम की माताRe
रेवाRevaनर्मदा नदीRe
रेवतीRevatiएक नक्षत्र का नामRe
रिमझिमRimjhimरिमझिम बारिशRi
रोहिणीRohiniएक नक्षत्र; चंद्रमा की पत्नीRo
रुचिRuchiरुचि, पसंदRu
रुक्मिणीRukminiश्रीकृष्ण की पटरानीRu
रूपाRupaसुंदर रूप वालीRu
रूपालीRupaliसुंदरRu
तनुजाTanujaपुत्रीTa
तन्वीTanviछरहरी, कोमलTa
तपस्याTapasyaतपTa
ताराTaraसिताराTa
तारिणीTariniपार लगाने वालीTa
तेजस्विनीTejaswiniतेजस्वीTe
तिलोत्तमाTilottamaएक अप्सराTi
तितिक्षाTitikshaसहनशीलताTi
तृप्तिTriptiसंतोषTi
तृष्णाTrishnaप्यास, इच्छाTi
त्रिवेणीTriveniतीन नदियों का संगमTi
तुलसीTulsiपवित्र तुलसीTu

तुला, यानी तराज़ू, शुक्र की वायु तत्व वाली राशि है और नाम खोजने वालों के लिए बड़ी उदार राशि है। इसके नौ अक्षर, रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू और ते, सभी भारतीय नामों की आम शुरुआती ध्वनियाँ हैं, और यहाँ का त वर्ग तरुण और तारा वाला कोमल दंत्य त है, सिंह राशि वाला कठोर मूर्धन्य ट नहीं। तुला राशि का बच्चा वह है जिसका चंद्रमा, सूर्य नहीं, जन्म के समय निरयण तुला में था, और सटीक अक्षर उस नक्षत्र के चरण से आता है जिसमें चंद्रमा उस समय था।

चित्रा, स्वाति और विशाखा

चित्रा का दूसरा आधा भाग रा और री के साथ तुला की शुरुआत करता है। चित्रा देवताओं के शिल्पी त्वष्टा का नक्षत्र है, इसका प्रतीक चमकता रत्न है और स्वामी मंगल है। इसके बाद पूरा स्वाति आता है, जिसके अक्षर रू, रे, रो और ता हैं। इसके देवता वायु हैं, स्वामी राहु है और प्रतीक हवा में झूमता कोमल अंकुर है, जो संतुलन की राशि के लिए बिल्कुल सटीक चित्र है। विशाखा के पहले तीन चरण ती, तू और ते के साथ तुला को पूरा करते हैं। विशाखा इंद्र और अग्नि दोनों का नक्षत्र है, इसका स्वामी गुरु है और प्रतीक विजय का तोरण द्वार है; इसका चौथा चरण, तो, वृश्चिक में पड़ता है।

चंद्रमा स्वाति को लगभग एक दिन में और पूरी राशि को लगभग सवा दो दिन में पार करता है, इसलिए कुछ ही घंटों के अंतर पर जन्मे तुला राशि के बच्चों के अक्षर भी अलग हो सकते हैं। फ़ैसला जन्म का समय करता है।

दोनों तरफ़ भरपूर अक्षर

र वाले अक्षरों से जाने-पहचाने नामों की लंबी सूची मिलती है: रा से राघव, राहुल, राजेश, राम, रवि, राधा, रानी; री से रितेश और रिया; रू से रुद्र, रूपेश और रूपा; रे से रेखा और रेवा; रो से रोहन, रोहित और रोहिणी। त वाले अक्षर भी लगभग उतने ही भरे हुए हैं: ता से तरुण, तन्मय, तारा और तन्वी; ती से तिलक और तिथि; तू से तुषार और तुलसी; ते से तेजस और तेजल। तृषा और तृप्ति में ऋ की मात्रा है, जो त्रि या त्रु की तरह सुनी जाती है, और दोनों पाठ तुला के अक्षर हैं, इसलिए ये नाम भी यहीं आते हैं।

एक नाम पर अलग से बात करनी होगी। ऋषि की सही वर्तनी में पहला अक्षर स्वर ऋ है, जबकि अवकहड़ा के अक्षर व्यंजन से शुरू होने वाले अक्षर हैं, इसलिए स्वर से शुरू होने वाले ऐसे नाम को भरोसे से किसी राशि में नहीं रखा जा सकता; तालिकाएँ इस पर एकमत नहीं हैं, और यह साइट इसे किसी राशि में नहीं रखती। रितेश जैसे र व्यंजन और इ से शुरू होने वाले नाम बिना किसी दुविधा के री के नाम हैं।

नाम की ध्वनि को तौलना

तुला का तराज़ू एक ऐसी आदत की याद दिलाता है जो बहुत से परिवारों में पहले से है: यह तौलना कि पहला नाम उपनाम और भाई-बहनों के नामों के साथ कैसा लगता है। चरण से अक्षर तय हो जाने के बाद भी एक अक्षर के नीचे नामों की सूची लंबी रहती है, और हर विकल्प को परिवार के नाम के साथ बोलकर देखना उसे छोटा करने का अच्छा तरीका है। अर्थ भी मायने रखता है, और इस पन्ने की सूचियों में हर नाम का आम तौर पर स्वीकार किया जाने वाला अर्थ दिया गया है।

परंपरा नामकरण दसवें से बारहवें दिन के बीच रखती है, हालाँकि बहुत से परिवार पहले कुछ हफ़्तों या महीनों में किसी अच्छे मुहूर्त का इंतज़ार करते हैं। संस्कार में चुना हुआ नाम बच्चे के दाहिने कान में धीरे से बोला जाता है, आगे की पूजा के लिए जन्म नाम लिख लिया जाता है, और अगर रोज़ का नाम अलग हो तो उसकी घोषणा परिवार के सामने की जाती है।

यहाँ तुला चंद्रमा की राशि है, लाइब्रा वाला जन्मदिन नहीं

सितंबर के आखिर से अक्टूबर के बीच जन्मा व्यक्ति सायन सन साइन वाले राशिफल में लाइब्रा होता है, पर इसका नामकरण वाली तुला राशि से कोई संबंध नहीं। तुला राशि का अर्थ है निरयण तुला में चंद्रमा, जहाँ चंद्रमा हर महीने लगभग सवा दो दिन रहता है, इसलिए तुला राशि के बच्चे पूरे साल जन्म लेते हैं।

बच्चे का नक्षत्र और अक्षर कैसे जानें

नामाक्षर चंद्रमा से तय होता है, सूर्य से नहीं: जन्म के क्षण चंद्रमा जिस नक्षत्र-चरण में था, वही अक्षर देता है। इसलिए तुला राशि का पता जन्म की तारीख के साथ समय और स्थान से चलता है। नक्षत्र कैलकुलेटर में जन्म का विवरण भरें, वह नक्षत्र, चरण और चंद्र राशि बताएगा; उसी चरण का अक्षर ऊपर की तालिका में देखें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

तुला राशि के नाम किन अक्षरों से रखे जाते हैं?

चित्रा के दूसरे आधे भाग से रा और री; स्वाति से रू, रे, रो और ता; और विशाखा के पहले तीन चरणों से ती, तू और ते। जन्म के समय चंद्रमा का चरण इन नौ में से एक अक्षर चुनता है।

क्या तारा और तरुण तुला राशि के नाम हैं?

हाँ। ये दंत्य त से शुरू होते हैं, जो स्वाति के चौथे चरण का अक्षर है। सिंह राशि का मूर्धन्य ट अलग अक्षर है, इसीलिए ये नाम तुला में रखे गए हैं।

बच्चे का जन्म स्वाति नक्षत्र में हुआ है। कौन सा अक्षर लागू होगा?

स्वाति के चार चरणों के अक्षर रू, रे, रो और ता हैं। चरण जन्म के सटीक समय से निकलता है, और उससे मिलने वाला अक्षर इस पन्ने की तालिका में दिया है।

ऋषि नाम तुला की सूची में क्यों नहीं है?

ऋषि की सही वर्तनी स्वर ऋ से शुरू होती है, और नामकरण की तालिकाएँ इस पर एकमत नहीं हैं कि ऐसा नाम किस राशि का है। र और इ से शुरू होने वाले रितेश जैसे नाम साफ़ तौर पर तुला के हैं।

क्या तुला राशि और लाइब्रा एक ही हैं?

केवल नाम के स्तर पर। नामकरण की तुला राशि जन्म के समय चंद्रमा की निरयण राशि है, जबकि सन साइन ज्योतिष में लाइब्रा तारीख के हिसाब से सूर्य की सायन राशि है।

दूसरी राशियों के नाम

हर राशि के अपने नौ नामाक्षर हैं। बच्चों के नाम →

यह भी देखें: तुला राशि का अर्थ और स्वभाव · जन्म कुंडली क्या है