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वृश्चिक राशि के नाम — तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू से लड़कों और लड़कियों के नाम

वृश्चिक राशि के नौ अक्षर हैं: तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू। ये विशाखा (चरण 4), अनुराधा (चारों चरण), ज्येष्ठा (चारों चरण) के नामाक्षर हैं, इसलिए बच्चे का अक्षर इस बात से तय होता है कि जन्म के समय चंद्रमा किस नक्षत्र के किस चरण में था। नीचे हर अक्षर का नक्षत्र और चरण, 39 लड़कों और 39 लड़कियों के नाम अर्थ सहित, और नाम चुनने की परंपरा दी गई है।

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वृश्चिक राशि के नामाक्षर

हर अक्षर किसी नक्षत्र के एक चरण का है; जन्म के समय चंद्रमा जिस चरण में था, वही बच्चे का अक्षर है।

अक्षरनक्षत्रचरण
तोविशाखा4
नाअनुराधा1
नीअनुराधा2
नूअनुराधा3
नेअनुराधा4
नोज्येष्ठा1
याज्येष्ठा2
यीज्येष्ठा3
यूज्येष्ठा4

अक्षर: अवकहड़ा चक्र (नामकरण के पारंपरिक अक्षर)।

वृश्चिक राशि के लड़कों के नाम

39 नाम, हर नाम ऊपर दिए किसी अक्षर से शुरू होता है, अर्थ सहित।

नामअर्थअक्षर
नचिकेतNachiketकठोपनिषद के सत्य-जिज्ञासु बालकNa
नागेंद्रNagendraनागों के राजाNa
नैमिषNaimishपवित्र नैमिषारण्य वन का नामNe
नैतिकNaitikनैतिक, सदाचारीNe
नकुलNakulपांडव भाइयों में से एकNa
नंदनNandanपुत्र; आनंद देने वालाNa
नंदकिशोरNandkishoreनंद के पुत्र; श्रीकृष्णNa
नंदलालNandlalनंद के लाल; श्रीकृष्णNa
नरहरिNarahariनर-सिंह रूप भगवान नृसिंहNa
नारायणNarayanभगवान विष्णुNa
नरेंद्रNarendraमनुष्यों के राजाNa
नरेशNareshराजाNa
नरोत्तमNarottamमनुष्यों में श्रेष्ठNa
नवीनNaveenनया, ताज़ाNa
नवनीतNavneetताज़ा मक्खनNa
नयनNayanआँखNa
नीलNeelनीलाNi
नीरजNeerajकमलNi
निखिलNikhilसंपूर्णNi
निकुंजNikunjलताओं का कुंजNi
निलयNilayघर, निवासNi
नीलकंठNilkanthनीले कंठ वाले; भगवान शिवNi
निमिषNimishपल, पलक झपकने भर का समयNi
निरंजनNiranjanनिर्मल, दोषरहितNi
नीरवNiravशांत, मौनNi
निर्भयNirbhayनिडरNi
निर्मलNirmalशुद्ध, स्वच्छNi
निशांतNishantरात का अंत; भोरNi
निश्चलNishchalअटल, स्थिरNi
निशिकांतNishikantरात के स्वामी; चंद्रमाNi
नीतीशNitishनीति के स्वामीNi
नित्यानंदNityanandशाश्वत आनंदNi
नृपेंद्रNripendraराजाओं के राजाNi
यदुनंदनYadunandanयदुकुल के नंदन; श्रीकृष्णYa
यशYashकीर्ति, यशYa
यशपालYashpalयश का रक्षकYa
यशवंतYashwantयशस्वीYa
युधिष्ठिरYudhishthirसबसे बड़े पांडव; युद्ध में स्थिरYu
युवराजYuvrajराजकुमार, युवराजYu

वृश्चिक राशि की लड़कियों के नाम

39 नाम, हर नाम ऊपर दिए किसी अक्षर से शुरू होता है, अर्थ सहित।

नामअर्थअक्षर
नैनाNainaआँखेंNe
नलिनीNaliniकमलिनीNa
नमिताNamitaविनम्र, नमन करने वालीNa
नम्रताNamrataविनम्रताNa
नंदाNandaआनंद; देवी दुर्गाNa
नंदिनीNandiniपुत्री; वशिष्ठ ऋषि की दिव्य गायNa
नंदिताNanditaप्रसन्न, आनंदितNa
नारायणीNarayaniदेवी लक्ष्मी का नामNa
नर्मदाNarmadaएक पवित्र नदीNa
नव्याNavyaनई, नवीनNa
नयनाNayanaनेत्रNa
नयनताराNayantaraआँख का ताराNa
नीलमNeelamनीलमणिNi
नीरजाNeerjaकमलNi
नीतिNeetiनीति, सदाचारNi
नेहाNehaस्नेह, प्रेमNe
निधिNidhiखज़ाना, निधिNi
निहारिकाNiharikaआकाश में तारों का धुँधला समूहNi
नीलाक्षीNilakshiनीली आँखों वालीNi
नीलिमाNilimaनीलापन; नीला आकाशNi
निरालीNiraliअनोखी, निरालीNi
निरंजनाNiranjanaनिर्मल, बेदागNi
निर्मलाNirmalaपवित्र, निर्मलNi
निरुपमाNirupamaअनुपमNi
निशाNishaरातNi
निशिगंधाNishigandhaरजनीगंधा का फूलNi
निष्ठाNishthaश्रद्धा, लगनNi
नित्याNityaशाश्वत, नित्यNi
निवेदिताNiveditaसमर्पितNi
नियतिNiyatiभाग्य, नियतिNi
नूपुरNupurपायल, घुँघरूNu
नूतनNutanनयाNu
यामिनीYaminiरातYa
यमुनाYamunaएक पवित्र नदीYa
यशस्विनीYashasviniयशस्वी, कीर्तिमानYa
यशोदाYashodaश्रीकृष्ण की पालक माताYa
यशोधराYashodharaगौतम बुद्ध की पत्नीYa
यशोमतीYashomatiयशस्वी; यशोदा का नामYa
युक्तिYuktiउपाय, कौशलYu

वृश्चिक मंगल की जल तत्व वाली राशि है और यह न और य वाले नामों की राशि है। इसके नौ नामाक्षरों में से पाँच न वर्ग के हैं और तीन य वर्ग के, और सबसे शुरुआत में विशाखा का एक दंत्य तो है। वृश्चिक राशि के बच्चे के माता-पिता के पास न की तरफ़ बहुत विकल्प हैं, य की तरफ़ थोड़े कम, और कौन सा अक्षर लागू होगा, यह जन्म के समय चंद्रमा के नक्षत्र-चरण से तय होता है।

विशाखा के अंतिम चरण से ज्येष्ठा के अंत तक

इंद्र और अग्नि के नक्षत्र विशाखा का चौथा चरण, जिसका स्वामी गुरु है, तो अक्षर के साथ इस राशि को खोलता है। इसके बाद पूरा अनुराधा आता है, जिसके अक्षर ना, नी, नू और ने हैं। इसके देवता मित्र हैं, जो मित्रता और समझौतों के देवता हैं, स्वामी शनि है और प्रतीक कमल है। राशि ज्येष्ठा के चारों चरणों पर पूरी होती है, जिसके नाम का अर्थ ही है सबसे बड़ा। ज्येष्ठा देवराज इंद्र का नक्षत्र है, इसका स्वामी बुध है और प्रतीक गोल ताबीज़ या कुंडल है; इसके अक्षर नो, या, यी और यू हैं।

अनुराधा और ज्येष्ठा मिलकर छब्बीस अंश चालीस कला में फैले हैं और चंद्रमा इन्हें लगभग दो दिन में पार कर लेता है। इस बीच अक्षर हर छह घंटे या उसके आसपास बदल जाता है, इसलिए केवल तारीख नहीं, जन्म का समय भी चाहिए।

न वाले नाम, य वाले नाम और दुर्लभ तो

न वाले अक्षर पूरे चक्र में सबसे आसान अक्षरों में हैं। ना से नवीन, नकुल, नरेंद्र, नंदिनी, नैना, नम्रता; नी से निखिल, नितिन, निधि, निशा, निकिता और दीर्घ ई वाला नील; नू से नूपुर; ने से नेहा। नो, जो ज्येष्ठा का पहला अक्षर है, उससे नाम कम मिलते हैं। य की तरफ़ या से यश, यशोदा, यामिनी और यशवी, और यू से युवराज, युग और युक्ति; यी से लगभग कोई भारतीय नाम शुरू नहीं होता। योगेश और योगिता देखने में इसी राशि के लगते हैं, पर यो मूल नक्षत्र का अक्षर है, इसलिए वे धनु राशि के नाम हैं।

तो दंत्य त की ध्वनि है, जैसी तोषण में। इससे बहुत कम नाम शुरू होते हैं, इसलिए विशाखा के अंतिम चरण में चंद्रमा वाले बच्चे का नाम प्रायः अनुराधा के न वाले अक्षरों से रखा जाता है, जो वृश्चिक में ही हैं, या उसे रोज़ के नाम के साथ तो से एक छोटा पूजा नाम दिया जाता है।

मित्रता, बड़प्पन और नाम

इस राशि के दोनों मुख्य नक्षत्रों के भाव साफ़ हैं। मित्र देवता वाला अनुराधा मैत्री और निष्ठा का नक्षत्र है, और इंद्र वाला ज्येष्ठा बड़प्पन और रक्षा का। कुछ माता-पिता ऐसा नाम पसंद करते हैं जिसमें ये भाव झलकें, पर ज़्यादातर लोग सही अक्षर के भीतर बस वह नाम चुनते हैं जो उन्हें प्रिय हो। परंपरा की अपनी चिंता इससे सीमित है: कि जन्म नाम, यानी नामकरण और आगे के संस्कारों में प्रयोग होने वाला नाम, चंद्रमा के चरण के अक्षर से शुरू हो।

यह संस्कार प्रायः जन्म के दसवें, ग्यारहवें या बारहवें दिन होता है, या बाद में पंचांग से चुने किसी दिन, और परिवार के सामने ज़ोर से पुकारे जाने से पहले नाम बच्चे के दाहिने कान में धीरे से बोला जाता है। जो परिवार दो नाम रखते हैं, वे नक्षत्र नाम कुंडली के लिए दर्ज कर लेते हैं और दूसरा नाम घर और स्कूल में चलता है।

वृश्चिक राशि और स्कॉर्पियो की तारीखें

अक्टूबर के आखिर से नवंबर के बीच जन्म लेने से कोई सायन सन साइन पद्धति में स्कॉर्पियो हो जाता है। नामकरण में वृश्चिक राशि का अर्थ है निरयण वृश्चिक में चंद्रमा, जहाँ चंद्रमा हर महीने लगभग सवा दो दिन रहता है। इसलिए वृश्चिक राशि का बच्चा किसी भी महीने में जन्म ले सकता है, और यह केवल जन्म के विवरण से ही पता चलता है।

बच्चे का नक्षत्र और अक्षर कैसे जानें

नामाक्षर चंद्रमा से तय होता है, सूर्य से नहीं: जन्म के क्षण चंद्रमा जिस नक्षत्र-चरण में था, वही अक्षर देता है। इसलिए वृश्चिक राशि का पता जन्म की तारीख के साथ समय और स्थान से चलता है। नक्षत्र कैलकुलेटर में जन्म का विवरण भरें, वह नक्षत्र, चरण और चंद्र राशि बताएगा; उसी चरण का अक्षर ऊपर की तालिका में देखें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

वृश्चिक राशि के नामाक्षर कौन से हैं?

विशाखा के चौथे चरण से तो; अनुराधा से ना, नी, नू और ने; और ज्येष्ठा से नो, या, यी और यू। जन्म के समय चंद्रमा जिस चरण में था, वही बच्चे का अक्षर चुनता है।

क्या योगेश वृश्चिक राशि का नाम है?

नहीं। यो मूल नक्षत्र के दूसरे चरण का अक्षर है, जो धनु राशि में पड़ता है। वृश्चिक के य वाले अक्षर या, यी और यू हैं, जिनसे यश, यामिनी और युवराज जैसे नाम बनते हैं।

बच्चे का जन्म अनुराधा नक्षत्र में हुआ है। नाम किस अक्षर से शुरू हो?

अनुराधा के चार चरणों के अक्षर ना, नी, नू और ने हैं। जन्म का सटीक समय चरण तय करता है; उसके बाद नवीन, निखिल, नूपुर या नेहा जैसे नाम ठीक बैठते हैं।

बच्चे का जन्म ज्येष्ठा में हुआ है। कौन सा अक्षर लागू होगा?

ज्येष्ठा के चरणों के अक्षर नो, या, यी और यू हैं। पहले चरण के लिए नो से नाम कम हैं, इसलिए परिवार अक्सर पूजा के लिए नो से छोटा नाम रखते हैं और रोज़ के लिए इसी राशि के किसी और अक्षर से नाम चुनते हैं।

क्या वृश्चिक राशि और स्कॉर्पियो का मतलब एक ही है?

नहीं। नामकरण की वृश्चिक राशि जन्म के समय चंद्रमा की निरयण राशि है; सन साइन ज्योतिष में स्कॉर्पियो तारीख के हिसाब से सूर्य की सायन राशि है, और दोनों कम ही मेल खाती हैं।

दूसरी राशियों के नाम

हर राशि के अपने नौ नामाक्षर हैं। बच्चों के नाम →

यह भी देखें: वृश्चिक राशि का अर्थ और स्वभाव · जन्म कुंडली क्या है