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वृषभ राशि के नाम — इ, उ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो से लड़कों और लड़कियों के नाम

वृषभ राशि के नौ अक्षर हैं: इ, उ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो। ये कृत्तिका (चरण 2–4), रोहिणी (चारों चरण), मृगशिरा (चरण 1–2) के नामाक्षर हैं, इसलिए बच्चे का अक्षर इस बात से तय होता है कि जन्म के समय चंद्रमा किस नक्षत्र के किस चरण में था। नीचे हर अक्षर का नक्षत्र और चरण, 42 लड़कों और 40 लड़कियों के नाम अर्थ सहित, और नाम चुनने की परंपरा दी गई है।

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वृषभ राशि के नामाक्षर

हर अक्षर किसी नक्षत्र के एक चरण का है; जन्म के समय चंद्रमा जिस चरण में था, वही बच्चे का अक्षर है।

अक्षरनक्षत्रचरण
इकृत्तिका2
उकृत्तिका3
एकृत्तिका4
ओरोहिणी1
वारोहिणी2
वीरोहिणी3
वूरोहिणी4
वेमृगशिरा1
वोमृगशिरा2

अक्षर: अवकहड़ा चक्र (नामकरण के पारंपरिक अक्षर)।

वृषभ राशि के लड़कों के नाम

42 नाम, हर नाम ऊपर दिए किसी अक्षर से शुरू होता है, अर्थ सहित।

नामअर्थअक्षर
एकनाथEknathएक ही स्वामी; एक मराठी संत का नामE
इंद्रIndraदेवताओं के राजाI
ईशानIshaanभगवान शिव का नाम; ईशान दिशाI
ईश्वरIshwarपरमेश्वर, भगवानI
ओजसOjasओज, तेजO
ओमOmपवित्र प्रणव अक्षरO
ओंकारOmkarओम की पवित्र ध्वनिO
ओमप्रकाशOmprakashओम का प्रकाशO
उदयUdayउगना; सूर्योदयU
उद्धवUddhavश्रीकृष्ण के सखा और सलाहकारU
उज्ज्वलUjjwalचमकदार, उजलाU
उमेशUmeshउमा के स्वामी; भगवान शिवU
उपेंद्रUpendraभगवान विष्णु का नामU
उत्कर्षUtkarshउन्नति, श्रेष्ठताU
उत्पलUtpalनील कमलU
उत्तमUttamसर्वश्रेष्ठU
वैभवVaibhavऐश्वर्य, समृद्धिVe
वर्धनVardhanबढ़ाने वाला; वृद्धिVa
वरुणVarunजल के वैदिक देवताVa
वसंतVasantवसंत ऋतुVa
वासुदेवVasudevभगवान कृष्ण का नामVa
वेदVedपवित्र ज्ञान; वेदVe
वेदांतVedantवेदों का सारVe
वीरVeerबहादुर, साहसीVi
वेंकटेशVenkateshवेंकट पर्वत के स्वामी; भगवान विष्णुVe
वेणुVenuबाँसुरीVe
विहानVihaanभोर, सुबहVi
विजयVijayजीतVi
विकासVikasउन्नति, प्रगतिVi
विक्रमVikramपराक्रम, वीरताVi
विमलVimalनिर्मल, स्वच्छVi
विनयVinayनम्रता, शिष्टताVi
विनायकVinayakभगवान गणेश का नामVi
विनीतVineetविनम्र, शिष्टVi
विनोदVinodआनंद, विनोदVi
विपिनVipinवन, जंगलVi
विराजVirajशोभायमान; सर्वोच्चVi
विशालVishalबहुत बड़ा, विशालVi
विष्णुVishnuसृष्टि के पालनहार भगवान विष्णुVi
विश्वनाथVishwanathविश्व के स्वामी; भगवान शिवVi
विवेकVivekसही और गलत की समझ, विवेकVi
व्योमVyomआकाशVo

वृषभ राशि की लड़कियों के नाम

40 नाम, हर नाम ऊपर दिए किसी अक्षर से शुरू होता है, अर्थ सहित।

नामअर्थअक्षर
एकताEktaएकजुटताE
इलाIlaपृथ्वीI
इंदिराIndiraदेवी लक्ष्मी का नामI
इंदुInduचंद्रमाI
इंदुमतीIndumatiपूर्णिमा का चंद्रमाI
इराIraपृथ्वी; देवी सरस्वतीI
ईशाIshaदेवी; ईश्वरीय शक्तिI
ईशानीIshaniईशान की अर्धांगिनी; देवी पार्वतीI
ईशिताIshitaश्रेष्ठता, प्रभुत्वI
ईश्वरीIshwariदेवीI
उज्ज्वलाUjjwalaउजली, चमकदारU
उमाUmaदेवी पार्वती का नामU
उन्नतिUnnatiतरक्की, उन्नतिU
उपासनाUpasanaउपासना, आराधनाU
ऊर्जाUrjaशक्ति, ऊर्जाU
उर्मिलाUrmilaलक्ष्मण की पत्नीU
उर्वशीUrvashiस्वर्ग की एक अप्सराU
उर्वीUrviपृथ्वीU
उषाUshaभोर, प्रभातU
उत्तराUttaraमहाभारत में अभिमन्यु की पत्नीU
वैदेहीVaidehiसीता, विदेह की राजकुमारीVe
वैष्णवीVaishnaviभगवान विष्णु की शक्ति; देवी दुर्गाVe
वंदनाVandanaवंदना, स्तुतिVa
वाणीVaniवाणी; देवी सरस्वतीVa
वर्षाVarshaबारिशVa
वर्तिकाVartikaदीपक की बातीVa
वासंतीVasantiवसंत ऋतु से जुड़ीVa
वसुधाVasudhaपृथ्वीVa
वसुंधराVasundharaपृथ्वी; धन को धारण करने वालीVa
वत्सलाVatsalaस्नेहमयीVa
वेदिकाVedikaयज्ञ की वेदीVe
वीणाVeenaएक तार वाद्य, वीणाVi
विभाVibhaचमक, प्रकाशVi
विभूतिVibhutiदिव्य शक्ति; पवित्र भस्मVi
विद्याVidyaज्ञान, विद्याVi
विजयाVijayaविजयी; देवी दुर्गाVi
विमलाVimalaनिर्मलVi
विनीताVinitaविनम्रVi
विशाखाVishakhaएक नक्षत्र का नामVi
वृंदाVrindaतुलसीVi

वृषभ शुक्र की पृथ्वी तत्व वाली राशि है और इसी राशि में चंद्रमा उच्च का होता है। इसके नामाक्षर भी अनोखे हैं: नौ में से चार अक्षर शुद्ध स्वर हैं। इसलिए वृषभ राशि के बच्चे के लिए इ, उ, ए या ओ से शुरू होने वाले नाम भी चुने जा सकते हैं और पूरा व वर्ग भी, जिससे यह नाम रखने के लिहाज़ से सबसे आसान राशियों में से एक है। किसी बच्चे पर कौन सा अक्षर लागू होगा, यह फिर भी जन्म के क्षण चंद्रमा के नक्षत्र-चरण पर निर्भर है।

वृषभ के अक्षर कहाँ से आते हैं

यह राशि कृत्तिका के आखिरी तीन चरणों, पूरे रोहिणी नक्षत्र और मृगशिरा के पहले आधे भाग से बनती है। अग्नि देवता और सूर्य के स्वामित्व वाली कृत्तिका से इ, उ और ए अक्षर मिलते हैं। रोहिणी, जो लाल रंग का तारा है, ब्रह्मा का नक्षत्र है, इसका स्वामी चंद्रमा है और इसका प्रतीक रथ है; इसके चार चरणों के अक्षर ओ, वा, वी और वू हैं। मृगशिरा का प्रतीक हिरण का सिर है, देवता सोम हैं और स्वामी मंगल है; मिथुन में जाने से पहले इसके पहले दो चरण वे और वो अक्षर देते हैं।

रोहिणी का भारतीय स्मृति में खास स्थान है, क्योंकि परंपरा श्रीकृष्ण का जन्म इसी नक्षत्र में मानती है। जिन परिवारों में रोहिणी के चंद्रमा में बच्चा जन्म लेता है, वे कभी-कभी कृष्ण से जुड़ा नाम खोजते हैं, और यहाँ अक्षर का ध्यान रखना पड़ता है: कृष्ण नाम स्वयं क अक्षर से शुरू होता है जो मिथुन का अक्षर है, जबकि वासुदेव और विष्णु रोहिणी के वा और वी चरणों में ठीक बैठते हैं।

स्वर, व वाले नाम और कुछ उलझी ध्वनियाँ

स्वर वाले अक्षरों से नाम खूब मिलते हैं। इ से ईशान, इंद्र, इरा और ईशा; उ से उदय, उमेश, उमा और उषा; ए से एकता और एकांश; ओ से ओम और ओजस। व वाले अक्षरों से तो और भी ज़्यादा: वरुण, विवेक, विक्रम, वेदांत, विद्या, वंदना, वीणा। स्वर का छोटा या बड़ा होना अक्षर नहीं बदलता, इसलिए दीर्घ ई वाला ईशान भी इ अक्षर का ही नाम है।

दो ध्वनियों में सावधानी चाहिए। वैभव और वैशाली जैसे वै से शुरू होने वाले नाम वा और वे दोनों तरह से सुने जाते हैं, और ये दोनों वृषभ के अक्षर हैं, इसलिए ये नाम यहाँ सुरक्षित हैं। वृंदा जैसे नाम, जिनमें व के बाद ऋ की मात्रा है, व्रि या व्रु की तरह बोले जाते हैं और फिर भी वृषभ में ही रहते हैं। इसके उलट केवल ऐ से शुरू होने वाला ऐश्वर्या जैसा नाम मेष के अ और वृषभ के ए के बीच झूलता है, इसलिए उसे किसी भी सूची में नहीं रखा गया।

नाम का चुनाव, समय का चुनाव

नामकरण संस्कार का अपना मुहूर्त भी देखा जाता है, और जो परिवार बारहवें दिन या उसके बाद संस्कार करते हैं, वे पंचांग देखकर ऐसा दिन चुनते हैं जब चंद्रमा अच्छी स्थिति में हो। वृषभ चंद्रमा की उच्च राशि है, इसलिए कुछ माता-पिता चंद्रमा या कोमलता से जुड़े अर्थ वाला नाम पसंद करते हैं, जैसे इंदु या विधु, पर यह रुचि की बात है, नियम की नहीं। परंपरा जिस बात पर ज़ोर देती है, वह है जन्म नाम का पहला अक्षर, यानी वह नाम जो पूजा-पाठ में बोला जाता है; रोज़ का नाम उसी अक्षर से हो भी सकता है और नहीं भी।

जब नामाक्षर ओ आता है, जिससे अपेक्षाकृत कम नाम बनते हैं, तो परिवार प्रायः रोहिणी के दूसरे अक्षरों, वा, वी और वू, तक चुनाव बढ़ा लेते हैं, या ओ से एक छोटा जन्म नाम रखकर रोज़ के लिए दूसरा नाम चुनते हैं। दोनों ही स्थितियों में कुंडली और मंदिर में इस्तेमाल होने वाला नाम चंद्रमा के चरण से जुड़ा रहता है।

टॉरस सन साइन से अलग

वृषभ राशि को अक्सर अप्रैल के आखिर और मई की टॉरस सन साइन समझ लिया जाता है। नामकरण में जिस राशि की बात होती है वह चंद्रमा की निरयण राशि है, जिसे चंद्रमा हर महीने लगभग सवा दो दिन में पार करता है, इसलिए वृषभ राशि का बच्चा किसी भी मौसम में जन्म ले सकता है। केवल जन्म की तारीख, समय और स्थान मिलकर बताते हैं कि चंद्रमा कृत्तिका, रोहिणी या मृगशिरा में था और किस चरण में।

बच्चे का नक्षत्र और अक्षर कैसे जानें

नामाक्षर चंद्रमा से तय होता है, सूर्य से नहीं: जन्म के क्षण चंद्रमा जिस नक्षत्र-चरण में था, वही अक्षर देता है। इसलिए वृषभ राशि का पता जन्म की तारीख के साथ समय और स्थान से चलता है। नक्षत्र कैलकुलेटर में जन्म का विवरण भरें, वह नक्षत्र, चरण और चंद्र राशि बताएगा; उसी चरण का अक्षर ऊपर की तालिका में देखें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

वृषभ राशि के नाम किन अक्षरों से रखे जाते हैं?

कृत्तिका के आखिरी तीन चरणों से इ, उ, ए; रोहिणी से ओ, वा, वी, वू; और मृगशिरा के पहले दो चरणों से वे, वो। जन्म के समय चंद्रमा का चरण इन नौ में से बच्चे का अक्षर तय करता है।

क्या वृषभ राशि का नाम किसी स्वर से शुरू हो सकता है?

हाँ, किसी भी दूसरी राशि से ज़्यादा। वृषभ के नौ में से चार अक्षर स्वर हैं, इ, उ, ए और ओ, इसलिए बच्चे के चरण के हिसाब से ईशान, उदय, एकता और ओम जैसे नाम ठीक बैठते हैं।

बच्चे का जन्म रोहिणी नक्षत्र में हुआ है। नाम किस अक्षर से रखें?

रोहिणी के चार चरणों के अक्षर क्रम से ओ, वा, वी और वू हैं। चरण जन्म के सटीक समय से निकलता है; नक्षत्र कैलकुलेटर उसे बताता है और उससे मिलने वाला अक्षर इस पन्ने की तालिका में है।

क्या वैभव वृषभ राशि का नाम है?

हाँ। इसका पहला अक्षर वै वा या वे दोनों तरह सुना जाता है, और दोनों ही वृषभ के अक्षर हैं, इसलिए यह नाम किसी भी पाठ में इसी राशि में आता है।

क्या वृषभ राशि और टॉरस एक ही हैं?

नहीं। नामकरण की वृषभ राशि वह निरयण राशि है जिसमें जन्म के समय चंद्रमा था, जबकि टॉरस सन साइन तारीख के हिसाब से सूर्य की सायन राशि है, इसलिए ज़्यादातर लोगों की ये दोनों राशियाँ अलग होती हैं।

दूसरी राशियों के नाम

हर राशि के अपने नौ नामाक्षर हैं। बच्चों के नाम →

यह भी देखें: वृषभ राशि का अर्थ और स्वभाव · जन्म कुंडली क्या है